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मनरेगा कार्य में भारी अनियमितता: स्टॉपडेम की राशि से बनाया चेकडेम, मजदूरी भुगतान पर भी सवाल

 मनरेगा कार्य में भारी अनियमितता: स्टॉपडेम की राशि से बनाया चेकडेम, मजदूरी भुगतान पर भी सवाल


कवर्धा । जिले के जनपद


पंचायत से.लोहारा के ग्राम पंचायत - चंदैनी में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत स्वीकृत स्टॉपडेम निर्माण कार्य में गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि स्टॉपडेम के नाम पर लगभग 18.73 लाख रुपये की स्वीकृति ली गई, जबकि मौके पर चेकडेम का निर्माण किया गया है, जिसकी वास्तविक लागत 12 से 13 लाख रुपये के बीच बताई जाती है।



स्थल पर लगाए गए नागरिक सूचना पट्ट के अनुसार कार्य की प्रशासकीय स्वीकृति राशि 18.73 लाख रुपये दर्शाई गई है तथा (मजदूरी भुगतान) श्रम मद में 2.25 लाख रुपये व्यय होना बताया गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि जहां स्टॉपडेम की लागत सामान्यतः लगभग 19 लाख रुपये तक आती है, वहीं चेकडेम का निर्माण 12-13 लाख रुपये में ही संभव है। ऐसे में शेष राशि के उपयोग को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।


ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि कार्य पूर्ण होने के बाद भी मजदूरों को (श्रम मद) मजदूरी की पूरी राशि का भुगतान नहीं किया गया। सूचना पट्ट में 2 लाख 25 हजार रुपये श्रम लागत अंकित है, लेकिन मजदूरों को अब तक लगभग 1 लाख रुपये ही भुगतान किया गया है। शेष राशि को लेकर पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है, जिससे फर्जी मस्टररोल भरने की आशंका जताई जा रही है।


ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण कार्य का मूल्यांकन इंजीनियर द्वारा किया गया तथा एसडीओ स्तर से सत्यापन भी हुआ, इसके बावजूद वास्तविक संरचना और स्वीकृत कार्य में अंतर नजर आ रहा है। ऐसे में तकनीकी परीक्षण और माप पुस्तिका (एमबी) की स्वतंत्र जांच की मांग उठ रही है।


अगर संबंधित अधिकारी पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करते है तो स्वीकृत स्टॉपडेम और निर्मित चेकडेम की तकनीकी तुलना, वास्तविक लागत का आकलन, मजदूरी भुगतान की जांच से यह स्पष्ट हो जाएगा। मनरेगा जैसी जनकल्याणकारी योजना में यदि इस प्रकार शासकीय राशि का दुरुपयोग होता है तो इससे योजना की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिन्ह लगना स्वाभाविक है।

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