कबीरधाम में शासकीय योजना 'जवाहर उत्कर्ष' की नाबालिग आदिवासी छात्रा से संस्थागत शोषण: छत्तीसगढ़ आदिवासी विकास परिषद ने की SIT जांच, DNA टेस्ट और दोषियों पर POCSO के तहत कड़ी कार्रवाई की मांग
कबीरधाम में शासकीय योजना 'जवाहर उत्कर्ष' की नाबालिग आदिवासी छात्रा से संस्थागत शोषण: छत्तीसगढ़ आदिवासी विकास परिषद ने की SIT जांच, DNA टेस्ट और दोषियों पर POCSO के तहत कड़ी कार्रवाई की मांग
कबीरधाम / कवर्धा:
छत्तीसगढ़ आदिवासी विकास परिषद (शाखा कबीरधाम) के जिलाध्यक्ष श्री कामू बैगा ने कबीरधाम (कवर्धा) के एक प्रतिष्ठित आवासीय विद्यालय (गुरुकुल आवासीय विद्यालय) में शासकीय संरक्षण में अध्ययनरत "गोंड समाज" ( जनजाति) की एक नाबालिग छात्रा के साथ हुए संस्थागत लैंगिक शोषण, 7.5 महीने तक 8 माह की गर्भावस्था को दबाने की साज़िश और मामले को छुपाने की कोशिशों पर कड़ा विरोध जताया है।
परिषद द्वारा इस पूरे मामले में माननीय पुलिस अधीक्षक महोदय, जिला कबीरधाम को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपकर उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच (SIT/Judicial Inquiry), नवजात शिशु एवं संदिग्धों के डीएनए (DNA) परीक्षण, संस्था की मान्यता रद्द करने तथा दोषी अधिकारियों, कर्मचारियों और अस्पताल प्रबंधन पर सख्त कार्रवाई की मांग की गई है।
मुख्य बिंदु एवं विचारणीय प्रश्न:
शासकीय योजना में लापरवाही: पीड़िता राज्य सरकार की 'जवाहर उत्कर्ष योजना' के तहत कबीरधाम स्थित गुरुकुल आवासीय विद्यालय में कक्षा 9वीं की छात्रा थी। योजना के तहत बच्ची की पूर्ण सुरक्षा और संरक्षण की जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की थी।
7.5 महीने की चुप्पी और संस्थागत सह-अपराधित्ता: शैक्षणिक सत्र के दौरान जून 2025 से जनवरी 2026 (लगभग 7.5 महीने) तक छात्रा हॉस्टल में ही रही। जनवरी 2026 में उसे अचानक शाला त्याग (TC) देकर घर भेज दिया गया, जहाँ पता चला कि वह 8 माह की गर्भवती है।
सवाल: क्या 8 महीने की गर्भावस्था हॉस्टल अधीक्षक, वार्डन और प्राचार्या से छुपी रह सकती है? यह साफ़ तौर पर मामले को दबाने और साक्ष्यों को नष्ट करने की आपराधिक साज़िश (Criminal Conspiracy) को दर्शाता है।
वैज्ञानिक साक्ष्य (DNA Test) की मांग: पीड़िता द्वारा नवजात शिशु को जन्म दिए जाने के बाद वास्तविक अपराधी की पहचान और संस्थागत शोषण की सत्यता स्थापित करने के लिए नवजात शिशु, मुख्य संदिग्धों और संस्था के कर्मचारियों के तत्काल डीएनए (DNA) प्रोफाइलिंग/टेस्ट कराने की मांग की गई है।
अस्पताल एवं पुलिस की भूमिका की जांच: पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) के तहत नाबालिग के प्रसव की सूचना पुलिस को न देने वाले अस्पताल प्रबंधन/चिकित्सकों पर भी धारा 21 के तहत कार्रवाई की मांग की गई है। साथ ही कबीरधाम पुलिस की निष्क्रियता पर भी सवाल खड़े किए गए हैं, क्योंकि मामला बीजापुर (थाना आवापल्ली, FIR No. 0011/2026) में दर्ज कराना पड़ा।
पूर्व आपराधिक इतिहास और संस्था की मान्यता रद्द करने की मांग: उक्त गुरुकुल आवासीय विद्यालय में पूर्व में भी एक 4 वर्षीय बच्ची के साथ दुष्कर्म का मामला सामने आ चुका है जिसमें न्यायालय से दोषियों को आजीवन कारावास की सजा हुई थी। बार-बार हो रही ऐसी घटनाओं को देखते हुए इस संस्थान की मान्यता तुरंत प्रभाव से स्थायी रूप से रद्द करने और इसे ब्लैकलिस्ट करने की मांग की गई है।
परिषद की प्रमुख मांगें:
SIT का गठन: स्वतंत्र विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर समयबद्ध निष्पक्ष जांच।
DNA प्रोफाइलिंग: नवजात शिशु एवं सभी संदिग्धों का तत्काल डीएनए टेस्ट।
सख्त धाराओं में कार्रवाई: वास्तविक दोषियों, स्कूल संचालक हॉस्टल अधीक्षक, वार्डन, प्राचार्य, तत्कालीन न करने वाले अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ POCSO Act, SC/ST Act एवं भा.न्या.सं. (BNS) की कठोरतम धाराओं में FIR व गिरफ्तारी।
मान्यता रद्द: गुरुकुल आवासीय विद्यालय, कबीरधाम की मान्यता और सरकारी अनुदान तुरंत रद्द करना।
पीड़िता को सुरक्षा व मुआवजा: पीड़ित बेटी और परिवार को 5 करोड़ की Witness Protection Unit के तहत सुरक्षा, धारा 183 BNS के तहत मजिस्ट्रेट बयान और उचित चिकित्सा व पुनर्वास सहायता।
अभिलेखों की जब्ती: हॉस्टल का उपस्थिति रजिस्टर, सीसीटीवी फुटेज और मेडिकल रिकॉर्ड अदालत/जांच एजेंसी के संरक्षण में तुरंत जब्त किए जाएं

